हिन्दू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व होता है, क्योंकि यह चंद्र मास का अंतिम दिन होता है। हर…
अध्याय 2 – सांख्य योग श्लोक 49 दूरेण ह्यवरं कर्म बुद्धियोगाद्धनञ्जय | बुद्धौ शरणमन्विच्छ कृपणा: फलहेतव: || 49|| सरल हिंदी…
अध्याय 2 – सांख्य योग श्लोक 48 योगस्थः कुरु कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा धनञ्जय | सिद्ध्यसिद्ध्योः समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते…
अध्याय 2 – सांख्य योग श्लोक 47 कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन | मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि || 47 || सरल…
बैसाखी (या वैसाखी) न केवल एक कृषि पर्व है, बल्कि यह धार्मिक जागृति, सांस्कृतिक उत्सव, और आध्यात्मिक चेतना का अद्वितीय…
वरूथिनी एकादशी हिन्दू पंचांग के अनुसार वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। "वरूथिनी" शब्द का…
अध्याय 2 – सांख्य योग श्लोक 46 यावानर्थ उदपाने सर्वतः सम्प्लुतोदके | तावान्सर्वेषु वेदेषु ब्राह्मणस्य विजानतः || 46|| सरल हिंदी…
अध्याय 2 – सांख्य योग श्लोक 45 त्रैगुण्यविषया वेदा निस्त्रैगुण्यो भवार्जुन | निर्द्वन्द्वो नित्यसत्त्वस्थो निर्योगक्षेम आत्मवान् || 45|| सरल हिंदी…
अध्याय 2 – सांख्य योग श्लोक 44 भोगैश्वर्यप्रसक्तानां तयापहृतचेतसाम् | व्यवसायात्मिका बुद्धि: समाधौ न विधीयते || 44|| सरल हिंदी में…
अध्याय 2 – सांख्य योग श्लोक 43 कामात्मान: स्वर्गपरा जन्मकर्मफलप्रदाम् | क्रियाविशेषबहुलां भोगैश्वर्यगतिं प्रति || 43|| सरल हिंदी में भावार्थ…
अध्याय 2 – सांख्य योग श्लोक 42 यामिमां पुष्पितां वाचं प्रवदन्त्यविपश्चित: | वेदवादरता: पार्थ नान्यदस्तीति वादिन: || 42|| सरल हिंदी…
अध्याय 2 – सांख्य योग श्लोक 41 व्यवसायात्मिका बुद्धिरेकेह कुरुनन्दन | बहुशाखा ह्यनन्ताश्च बुद्धयोऽव्यवसायिनाम् || 41|| सरल हिंदी में भावार्थ…
"*" आवश्यक फ़ील्ड इंगित करता है


